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विटामिन `C´ की कमी से होने वाले रोग-और विटामिन `B´ के बारे मे खास बातें और फायदे नुकसान जानिए.

विटामिन `C´ की कमी से होने वाले रोग-और विटामिन  `B´ के बारे मे खास बातें और फायदे नुकसान जानिए. 

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विटामिन `सी´ के स्रोत वाले खाद्य पदार्थों की तालिका-
विटामिन `सी´ की महत्वपूर्ण बातें-
  • विदेशों में न्यूमोनिया तथा लाल ज्वर जैसे खतरनाक संक्रमण युक्त रोगों में विटामिन `सी´ रोगी को देना अति आवश्यक समझा जाता है।
  • कनपेड़े अर्थात् मम्पस रोगों में रोगी को विटामिन सी पानी में घोलकर पिलाते रहने से सूजन, वेदना तथा ज्वर धीरे-धीरे नष्ट हो जाते हैं।
  • काली खांसी में विटामिन `सी´ लाभ प्रदान करता है।
  • जोड़ों में सूजन होने के दर्द में विटामिन `सी´ लाभप्रद हो जाता है।
  • मोतियाबिन्द के रोगी को विटामिन `सी´ देने से मोतियाबिन्द रुक जाता है।
  • गर्भावस्था में विटामिन `सी´ का प्रयोग करने से सूजन समाप्त हो जाती है।
  • विटामिन `सी´ की कमी से रोगी स्कर्वी रोगका शिकार हो जाता है।
  • विटामिन `सी´ गंधहीन तथा रंगहीन होता है।
  • विटामिन `सी´ रक्त में लाल कणों को बनाने में अति महत्वपूर्ण कार्य करता है।
  • शरीर में विटामिन `सी´ की कमी हो जाने से कोशिकाओं तथा रक्त कोशिकाओं की दीवारें फटने लगती हैं और रोगी कई रोगों के संक्रमण का शिकार हो जाता है।
  • गर्भपात को रोकने के लिए विटामिन `सी´ का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
  • शरीर के किसी भी अंग से रक्तस्राव को रोकने में विटामिन `सी´ सहायता प्रदान करता है।
  • विटामिन `सी´ की कमी से आमाशय में घावहो जाते हैं।
  • क्षय (टी.बी.) रोग में विटामिन `सी´ का प्रयोग बहुत लाभ करता है।
  • टूटी हड्डी को जोड़ने के लिए ऑप्रेशन के बाद विटामिन `सी´ की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।
  • फेफड़े का रक्तस्राव विटामिन `सी´ के प्रयोग से रुक जाता है।
  • विटामिन `सी´ की कमी से पायरिया रोग होता है। जो विटामिन `सी´ का प्रयोग करने पर ठीक हो जाता है।
  • यदि थोड़ा काम करते ही रोगी थक जाता है तो यह शरीर में विटामिन `सी´ की कमी का कारण है।
  • सांस के रोग का होना ही साबित करता है कि रोगी के शरीर में लंबे समय से विटामिन `सी´ की कमी होती चली आ रही है।
  • विटामिन `सी´ की कमी से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता समाप्त हो जाती है।
  • विटामिन `सी´ के प्रयोग से शरीर की रक्तवाहिनियां लचीली हो जाती हैं और उनकी कठोरता समाप्त हो जाती है।
  • विटामिन `सी´ बूढ़ों में भी चुस्ती-फुर्ती और शक्ति का संचार करने में मददगार होती है।
  • विटामिन `सी´ के प्रयोग से हर प्रकार की एलर्जी में लाभ होता है।
  • चलते-चलते थक जाना, दर्द होना, ऐंठन होनाशरीर में विटामिन `सी´ की कमी को दर्शाता है।
  • विटामिन `सी´ को पानी में घोलकर पीने से सांप के विष का प्रभाव भी समाप्त हो जाता है।
  • विटामिन `सी´ की कमी से घाव भरने में देरी लगती है।
  • विटामिन `सी´ के प्रयोग से नासूर जैसे खतरनाक घाव भी ठीक होने लगते हैं।
  • आग में जल जाने के बाद तुरन्त ही विटामिन `सी´ का प्रयोग करने से जलन एवं वेदना में धीरे-धीरे आराम होने लगता है।
  • विटामिन `सी´ की टिकिया कारबंकल जैसे भयंकर घावों पर पीसकर भर देने से घाव जल्दी ही ठीक होने लगते हैं।
  • विटामिन `ए´ की भांति विटामिन `सी´ का भी नेत्र रोग के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव होता है।
  • विटामिन `सी´ को ही एस्कोर्बिक एसिड कहा जाता है और यह जल में घुलनशील होता है।
  • विटामिन `सी´ को टूटे-फूटे अंगों को जोड़ने के लिए सीमेंट जैसी संज्ञा दी जा सकती है।
  • विटामिन `सी´ की कमी से शरीर में खून की कमी हो जाती है।
  • विटामिन `सी´ खून में लाल कणों की वृद्धि करने में सहायक होता है।
  • अर्टिकेरिया, फीवर, त्वचा के दानों में रोगी को विटामिन `सी´ देने से लाभ होता है।
  • विषैले जन्तुओं के काट लेने पर विटामिन `सी´ से तुरन्त राहत मिलती है तथा जलन और दर्द दूर हो जाते हैं।
  • ज्वर (बुखार) हो तो विटामिन `सी´ का इंजेक्शन देते ही ज्वर उतर जाता है।
  • प्रोस्टेट ग्लैण्ड का संक्रमण विटामिन `सी´ से शान्त हो जाता है।
  • आंख, नाक, कान और गले के रोगों एवं विकारों के लिए विटामिन सी का प्रयोग अतिशय गुणकारी प्रभाव रखता है।
  • विटामिन `सी´ की कमी से हडि्डयों के जोड़ों में से रक्तस्राव होने लगता है। कभी-कभी हडि्डयों के यह अन्तिम छोर अलग ही हो जाते हैं।
  • स्वस्थ शरीर के लिए 25 से 30 मिलीग्राम विटामिन `सी´ पर्याप्त होता है।
  • बच्चों के शरीर में विटामिन `सी´ की पूर्ति करनी हो तो नारंगी, आंवला, मौसमी का रस पिलाना ही पर्याप्त है। आंवला विटामिन `सी´ के लिए सबसे उत्तम होता है। सूखे और ताजे दोनों आंवलों में यह विटामिन समान रूप से विद्यमान रहता है।
  • संधिवातसंधिशोथ तथा आमवात यानी जोड़ों के दर्द में विटामिन `सी´ गुणकारी उत्तम प्रभाव पैदा करता है।
  • यदि शरीर में विटामिन `सी´ की अत्यधिक कमी हो तो शीघ्र लाभ के लिए इंजेक्शन का प्रयोग करना ज्यादा हितकर होता है।
  • एक वर्ष से डेढ़ वर्ष तक के बच्चों को यह विटामिन प्रतिदिन 50 मिलीग्राम तक की मात्रा में देना आवश्यक होता है।
  • विटामिन `सी´ की कमी से त्वचा लटक जाती है तथा चेहरे एवं शरीर पर झुर्रियां पड़ जाती हैं।
  • पक्षाघात तथा पोलियों जैसे रोग शरीर में विटामिन `सी´ की कमी से होते हैं जिन्हें विटामिन `सी´ का प्रयोग करके ठीक किया जा सकता है।
  • चेहरे के खतरनाक दाग-धब्बे विटामिन `सी´ के प्रयोग से ठीक हो जाते हैं।
  • कंजेस्टिट हार्ट फेल्यूर रोग में विटामिन `सी´ का प्रयोग करने से अधिक पेशाब आकर शरीर की सूजन तथा हृदय की तकलीफ सहित अन्य कई विकार नष्ट हो जाते हैं।
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परिचय-

विटामिन बी-काम्पलेक्स शरीर को जीवनी शक्ति देने के लिए अति आवश्यक होता है। 

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इस विटामिन की कमी से शरीर अनेक रोगों का गढ़ बन जाता है। विटामिन-बी के कई विभागों की भी खोज -की जा चुकी है ये सब विभाग मिलकर ही विटामिन B-काम्पलेक्स कहलाते।

हालांकि ये सभी- विभाग एक दूसरे के भी अभिन्न अंग हैं, लेकिन फिर भी ये सभी आपस में ही भिन्नता रखते हैं। 

विटामिन B काम्पलेक्स 120 सेंटी ग्रेड तक की गर्मी को सहन करने की क्षमता भी रखता है। उससे ज्यादा अधिक ताप यह सहन ही नहीं कर पाता है और नष्ट हो जाता है, यह विटामिन पानी में घुलनशील है। 

इसका प्रमुख कार्य स्नायु को स्वस्थ रखना तथा भोजन के पाचन में सक्रिय योगदान देना होता है। भूख को बढ़ाकर यह शरीर को जीवनी शक्ति देता है। 

ये खाए-पिए हुए पदार्थों को अंग लगाने में सहायता प्रदान करता है। क्षार पदार्थों के संयोग से यह भी बिना किसी भी ताप के नष्ट ही हो जाता है, पर ये अम्ल के साथ भी उबाले जाने पर भी नष्ट ही नहीं होता है 

विटामिन-`बी´ काम्पलेक्स की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग-

हाथ पैरों की उंगलियों में सनसनाहट होना।

मस्तिष्क की स्नायु में सूजन व दोष होना।

पैर ठण्डे व गीले होना।

सिर के पिछले भाग में स्नायु दोष हो जाना ।

मांसपेशियों का कमजोर होना ।

हाथ-पैरों के जोड़ अकड़ना।

शरीर का वजन घट जाना |

नींद कम आना।

मूत्राशय मसाने में दोष आना ।

महामारी की खराबी होना ।

शरीर पर लाल-चकत्ते निकलना।

दिल कमजोर होना ।

शरीर में सूजन आना ।

सिर चकराना ।

नजर कम हो जाना।

पाचन क्रिया की खराबी होना ।

विटामिन बी-काम्पलेक्स के स्रोत खाद्य पदार्थ-

टमाटर
भूसी दार गेंहू का आटा
अण्डे की जर्दी
हरी पत्तियों के साग
बादाम
अखरोट
बिना पॉलिश किया चावल
पौधों के बीज
सुपारी
नारंगी
अंगूर
दूध
ताजे सेम
ताजे मटर
दाल
जिगर
वनस्पति शाक भाजी
आलू
मेवा
खमीर
मक्की
चना
नारियल
पिस्ता
ताजे फल
कमरकल्ला
दही
पालक
बन्दगोभी
मछली
अण्डे की सफेदी
माल्टा
चावल की भूसी
फलदार सब्जी
विटामिन बी-काम्पलेक्स के प्रमुख विभाग

1.

विटामिन बी1

थाईमिन हाइड्राक्लोराइट

(नोट-इसे एन्यूरिन तथा बेरी-बेरी विटामिन भी कहा जाता है।)


2

विटामिन बी2

रिबोफ्लेबिन अथवा लैक्टोफ्लेबिन

इसको विटामिन `जी´ भी कहा जाता है।

3

विटामिन बी3

पैन्टोथेनिक एसिड

4

विटामिन बी4

एमाइनो एसिड

5

विटामिन बी6

पायरीडॉक्सीन

6

विटामिन बी7

-

7

विटामिन बी12

-

8

फोलिक एसिड

-

9

यीस्ट

खमीर

10

निकोटनिक एसिड

-

11

नियासिन

-

12

निकोटिनामाइड

-

13

पैरा-एमीनो बेन्जोइएक एसिड

-

14

विटामिन `ए´

बायोटिन

15

एडेनिल्कि एसिड

-

16

कोलीन

-

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